
गोवर्धन पूजा 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास Govardhan Puja 2025: (Shubh Muhurat, Mahatva Aur Itihas): गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) हिंदू धर्म में दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे अन्नकूट (Annakut) के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व रखता है, बल्कि यह प्रकृति, कृषि और गोवंश की पूजा का प्रतीक भी है। क्या आप जानते हैं कि गोवर्धन पूजा का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व क्या है? इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन पर्वत को उठाने की कथा क्यों सुनाई जाती है, और इसका जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है? यदि आप गोवर्धन पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि हिंदू पंचांग के अनुसार इसका निर्धारण कैसे किया जाता है।
इस दिन विशेष रूप से अन्नकूट महोत्सव, गोवर्धन परिक्रमा और गौ पूजन का क्या महत्व है? क्या इस दिन सही विधि से पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, कृषि उन्नति और परिवार में खुशहाली आती है? इस लेख में हम आपको गोवर्धन पूजा 2025 की सम्पूर्ण जानकारी देंगे—इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक इतिहास और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
यदि आप भी इस पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण (Bhagwan Krishna) और गोमाता की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें…
गोवर्धन पूजा क्या है? | Govardhan Puja Kya Hai?

गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) हिंदू धर्म में दीपावली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण किया जाता है, जब उन्होंने इंद्रदेव के कोप से गोकुलवासियों की रक्षा की थी। श्रद्धालु गोवर्धन पर्वत के प्रतीक रूप में गोबर से पर्वत बनाकर उसकी पूजा करते हैं और अन्नकूट का भोग अर्पित करते हैं। विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं, जिससे यह कृषि और समृद्धि का प्रतीक बनता है। विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र में इसे धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन गोधन यानी गायों की पूजा भी की जाती है, जिससे यह प्रकृति और पशुधन के महत्व को दर्शाता है।
गोवर्धन पूजा 2025 कब है? | Govardhan Puja 2025 Kab Hai?

गोवर्धन पूजा 2025 (Govardhan Puja 2025) में 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि को आता है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं और गोवर्धन पर्वत की आराधना करते हैं। यह दिन दीपावली के अगले दिन आता है |
गोवर्धन पूजा 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है? | Govardhan Puja 2025 Ka Shubh Muhurat Kya Hai?
विवरण | तिथि / समय | अवधि |
गोवर्धन पूजा | 22 अक्टूबर 2025 | पूरे दिन |
पूजा का मुहूर्त | सुबह 06:26 AM – 08:42 AM | 2 घंटे 16 मिनट |
गोवर्धन पूजा की पूजा विधि क्या है? | Govardhan Puja Ki Puja Vidhi Kya Hai?
- स्नान और संकल्प: प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा करने का संकल्प लेकर पूजन सामग्री एकत्रित करें। घर के आंगन में या पूजा स्थान पर विशेष स्थान तैयार करें।
- गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक स्थापना: गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाएं या उसका स्वरूप तैयार करें। कुछ लोग मिट्टी या आटे से गोवर्धन पर्वत बनाकर उनका पूजन करते हैं। इसके साथ गाय, बछड़े और भगवान कृष्ण की मूर्ति रखी जाती है।
- वैदिक मंत्रों के साथ पूजन: रोली, चावल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत का पूजन करें। गोवर्धन पूजा के दौरान श्रीकृष्ण के गोवर्धन लीला का पाठ करें और “गोवर्धनाय नमः” मंत्र का जाप करें।
- अन्नकूट प्रसाद का भोग: भगवान को अन्नकूट का भोग अर्पित करें, जिसमें विभिन्न प्रकार के पकवान, मिठाइयां और अन्न मिलाकर भोग लगाया जाता है। इस प्रसाद को सभी भक्तों में बांटकर गोवर्धन पूजन की महिमा का प्रचार करें।
- गौ माता की पूजा एवं परिक्रमा: गौ माता की विशेष पूजा करें, उन्हें गुड़, चना और हरी घास खिलाएं। गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक परिक्रमा करें और अपने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें। पूजा के बाद भक्तगण भजन-कीर्तन करते हैं।
यह भी पढ़ें :-
- धनतेरस पूजा विधि
- धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए
- मां लक्ष्मी चालीसा
- लक्ष्मी पूजन सामग्री लिस्ट
- धनतेरस 2025 शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा की कथा क्या है? | Govardhan Puja Ki Katha Kya Hai?
प्राचीन काल में ब्रज में रहने वाले लोग भगवान इंद्र की पूजा करते थे। उनका विश्वास था कि इंद्र देव वर्षा करके उनकी फसलों को सुरक्षित रखते हैं और उन्हें धन-धान्य से भरपूर करते हैं। एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने गांववालों से पूछा कि वे इंद्र देव की पूजा क्यों करते हैं? तब ग्वालों ने उत्तर दिया कि इंद्र ही उन्हें जल प्रदान करते हैं और उनकी आजीविका का साधन बनते हैं। इस पर श्रीकृष्ण ने समझाया कि असली संरक्षक गोवर्धन पर्वत है, क्योंकि वही बारिश के जल को रोके रखता है, भूमि को उपजाऊ बनाता है, पशुओं को चारा प्रदान करता है और गांववालों को प्राकृतिक संसाधन देता है। अतः हमें गोवर्धन पर्वत और गौ माता की पूजा करनी चाहिए, न कि इंद्र देव की।
श्रीकृष्ण के इस तर्क से प्रभावित होकर सभी ग्वालों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का निश्चय किया। उन्होंने अन्नकूट महोत्सव मनाया, जिसमें गोवर्धन पर्वत को अन्न और भोग से सजाया गया। जब इंद्र देव को यह ज्ञात हुआ कि ब्रजवासी उनकी पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा कर रहे हैं, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। क्रोध में आकर उन्होंने ब्रज पर मूसलधार वर्षा शुरू कर दी। चारों ओर पानी ही पानी हो गया और लोग भयभीत होकर श्रीकृष्ण के पास सहायता मांगने पहुंचे।
भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण लेने को कहा। सात दिनों तक लगातार वर्षा होती रही, लेकिन श्रीकृष्ण ने पर्वत को स्थिर रखा और सभी को सुरक्षित रखा। अंततः जब इंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी और वर्षा रोक दी। उन्होंने स्वीकार किया कि अहंकार में आकर उन्होंने गलत कार्य किया था और अब वे श्रीकृष्ण को ही सर्वोच्च मानते हैं।
तभी से इस दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन लोग गायों की पूजा करते हैं, गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाकर अन्नकूट का आयोजन करते हैं और भगवान कृष्ण की कृपा के लिए आभार प्रकट करते हैं। यह पर्व हमें प्रकृति के महत्व, अहंकार के नाश और भक्तों की रक्षा का संदेश देता है।
गोवर्धन पूजा का महत्व क्या है? | Govardhan Puja Ka Mahatva Kya Hai?
- प्राकृतिक संतुलन और संरक्षण का संदेश: यह पर्व हमें प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का महत्व सिखाता है। भगवान कृष्ण ने इंद्र देव के कोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था, जिससे जलवायु संतुलन का संदेश मिलता है।
- गौ माता और कृषि का सम्मान: गोवर्धन पूजा में गौ माता की विशेष पूजा की जाती है, जिससे उनकी महत्ता का बोध होता है। यह पर्व कृषि और पशुपालन पर निर्भर जीवनशैली का सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
- भक्ति और सामूहिक सौहार्द का प्रतीक: इस दिन भक्तजन मिलकर अन्नकूट प्रसाद तैयार करते हैं और सामूहिक रूप से पूजा करते हैं। इससे समाज में एकता, सहयोग और भक्ति भाव को बढ़ावा मिलता है।
Conclusion
हम आशा करते है कि हमारे द्वारा लिखा गया (गोवर्धन पूजा 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास) यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आपके पास किसी भी तरह का सवाल या सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में जरुर दर्ज करें, हम जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे। बाकि ऐसे ही रोमांचक लेख के लिए हमारी वेबसाइट जन भक्ति पर दोबारा विज़िट करें, धन्यवाद
FAQ’s
Q. गोवर्धन पूजा कब मनाई जाती है?
Ans. गोवर्धन पूजा दीपावली के अगले दिन, कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है।
Q. गोवर्धन पूजा को और किस नाम से जाना जाता है?
Ans. गोवर्धन पूजा को अन्नकूट उत्सव के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है।
Q. गोवर्धन पूजा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Ans. इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति, गौ माता और गोवर्धन पर्वत के प्रति आभार प्रकट करना और भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का स्मरण करना है।
Q. गोवर्धन पूजा 2025 में कब मनाई जाएगी?
Ans. गोवर्धन पूजा 2025 में 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
Q. गोवर्धन पूजा में कौन-कौन सी प्रमुख गतिविधियां होती हैं?
Ans. इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाई जाती है, गौ माता की पूजा की जाती है, और अन्नकूट का भोग अर्पित किया जाता है।
Q. गोवर्धन पूजा की कथा किससे संबंधित है?
Ans. यह कथा भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है, जब उन्होंने इंद्र देव के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाया था।