
धनतेरस 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास Dhanteras 2025: (Shubh Muhurat, Mahatva Aur Itihas): धनतेरस (Dhanteras) हिंदू धर्म में दीपावली महोत्सव की शुरुआत का प्रथम दिन होता है, जिसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख-शांति का भी प्रतीक है। क्या आप जानते हैं कि धनतेरस का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व क्या है? इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा क्यों की जाती है, और इसका जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है?
यदि आप धनतेरस 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि हिंदू पंचांग के अनुसार इसका निर्धारण कैसे किया जाता है। इस दिन विशेष रूप से सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने का क्या महत्व है? क्या इस दिन सही तरीके से पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है? इस लेख में हम आपको धनतेरस 2025 की सम्पूर्ण जानकारी देंगे—इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक इतिहास और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
यदि आप भी इस पावन अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें…
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धनतेरस क्या है? | Dhanteras Kya Hai?

धनतेरस (Dhanteras) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो दीपावली से दो दिन पहले कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और कुबेर की पूजा की जाती है, क्योंकि यह धन, समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते हैं, जिससे सौभाग्य और संपन्नता का आगमन होता है। विशेष रूप से इस दिन दीप जलाकर यमराज की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। यह पर्व दिवाली के शुभारंभ का संकेत देता है और घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाने का संदेश देता है।
धनतेरस 2025 कब है? | Dhanteras 2025 Kab Hai?
2025 में धनतेरस (Dhanteras) का त्यौहार 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को आता है और इसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन खरीदारी करना विशेष महत्व रखता है।
धनतेरस 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है? | Dhanteras 2025 Ka Shubh Muhurat Kya Hai?
S.NO | विवरण | समय / अवधि |
1 | धनतेरस | 18 अक्टूबर 2025 |
2 | धनतेरस पूजा मुहूर्त | 07:31 PM से 08:28 PM (अवधि: 57 मिनट) |
3 | यम दीपक | रात्रि में दीप जलाने का विशेष महत्व |
धनतेरस की पूजा विधि क्या है? | Dhanteras Ki Puja Vidhi Kya Hai?

- स्नान एवं स्वच्छता: धनतेरस (Dhanteras) के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर, विशेष रूप से पूजा स्थल और मुख्य द्वार की सफाई करें। माना जाता है कि स्वच्छ वातावरण में देवी लक्ष्मी वास करती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- कलश स्थापना एवं दीप प्रज्वलन: पूजा स्थान पर एक तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें और उसमें जल भरकर आम के पत्ते रखें। घी या तेल का दीपक जलाएं, जो देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए शुभ माना जाता है।
- भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी और कुबेर की पूजा: भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। भगवान धन्वंतरि को तुलसी, औषधियां, पीले फूल और नैवेद्य अर्पित करें, जबकि माता लक्ष्मी की विशेष रूप से कमल के फूल और धूप-दीप से पूजा करें।
- धनतेरस मंत्रों का जाप: पूजा के दौरान “ॐ धन्वंतरये नमः” और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्रों का जाप करें। कुबेर देव को प्रसन्न करने के लिए “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः” मंत्र का उच्चारण करें।
- संपत्ति व आभूषणों की पूजा: इस दिन विशेष रूप से सोना-चांदी, नए बर्तन और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की पूजा की जाती है। इन्हें लाल कपड़े पर रखकर कुमकुम, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएं, जिससे धन वृद्धि और आर्थिक समृद्धि बनी रहती है।
- दीपदान और यमराज के लिए विशेष दीप जलाना: धनतेरस की रात मुख्य द्वार पर तेल का दीपक जलाकर यमराज के नाम से दक्षिण दिशा में रखें। इसे ‘यमदीपदान’ कहते हैं, जिससे अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- प्रसाद वितरण और परिवार संग उत्सव मनाना: पूजा समाप्त होने के बाद लक्ष्मी माता को भोग अर्पित करें और परिवारजनों में प्रसाद बांटें। इस दिन मिठाइयां और व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करने के बाद परिवार के साथ धनतेरस का पर्व उल्लासपूर्वक मनाएं।
धनतेरस की कथा क्या है? | Dhanteras Ki Katha Kya Hai?
1. भगवान धन्वंतरि से जुड़ी कथा
धनतेरस (Dhanteras) केवल धन-वैभव का ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आरोग्य का भी पर्व है, क्योंकि इसी दिन भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। समुद्र मंथन की अनोखी घटना के दौरान जब देवताओं और असुरों ने मिलकर अमृत की खोज की, तो समुद्र से कई दिव्य वस्तुएं प्राप्त हुईं—इनमें रत्न, लक्ष्मी माता, उच्चैःश्रवा घोड़ा और हलाहल विष भी था।
इन्हीं में से एक अत्यंत दिव्य और तेजस्वी स्वरूप था—भगवान धन्वंतरि। वे अपने हाथों में अमृत से भरा हुआ कलश लिए समुद्र से प्रकट हुए थे। उनका यह प्राकट्य कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ था। चूंकि भगवान धन्वंतरि चिकित्सा और आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से रोगों का नाश होता है और जीवन में आरोग्य एवं दीर्घायु प्राप्त होती है। भगवान धन्वंतरि के हाथ में कलश था, इसी कारण धनतेरस के दिन बर्तन, सोना और चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन केवल भौतिक धन-समृद्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमें स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और आयुर्वेद के महत्व को समझने का भी संदेश देता है।
2. भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी कथा
धनतेरस (Dhanteras) का पावन पर्व केवल धन-संपत्ति से ही नहीं, बल्कि न्याय और धर्म की विजय से भी जुड़ा हुआ है। इस पर्व की एक प्राचीन कथा हमें भगवान विष्णु के वामन अवतार की याद दिलाती है, जिसे भागवत पुराण में विस्तार से वर्णित किया गया है।
कथा के अनुसार, असुरराज बलि अपने पराक्रम और दानवीरता के कारण तीनों लोकों का स्वामी बन बैठा था। देवगण अपनी खोई हुई संपत्ति और स्वर्ग को वापस पाने के लिए भगवान विष्णु की शरण में गए। तब भगवान ने वामन अवतार धारण किया—एक छोटे ब्राह्मण के रूप में वे राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे और दान में केवल तीन पग भूमि की याचना की। दानवीर बलि ने सहर्ष यह दान स्वीकार कर लिया, लेकिन जैसे ही वामन भगवान ने अपना स्वरूप बढ़ाया, उन्होंने एक पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्गलोक को नाप लिया। जब तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचा, तो बलि ने विनम्रता से अपना सिर भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। इस प्रकार, भगवान विष्णु ने बलि को सुतल लोक का राजा बना दिया और देवताओं को उनका स्वर्ग पुनः प्राप्त हुआ। यह घटना कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुई थी, इसलिए धनतेरस का पर्व इसी दिन मनाया जाता है, जो हमें सिखाता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन से नहीं, बल्कि धर्म और कर्तव्यपालन से प्राप्त होती है।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ होता है? | Dhanteras Par Kya Kharidna Shubh Hota Hai?
- सोना-चांदी: धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे आर्थिक समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।
- बर्तन: इस दिन तांबे, पीतल या चांदी के बर्तन खरीदना शुभ होता है, जिससे सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
- झाड़ू: धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
- धनिया के बीज: यह खरीदने और बोने से घर में बरकत होती है और आने वाले वर्ष में समृद्धि बनी रहती है।
- नमक: धनतेरस पर नमक खरीदकर भंडार घर में रखने से घर में बरकत बनी रहती है और धन की वृद्धि होती है। इसे एक साल तक उपयोग नहीं करना चाहिए।
- इलेक्ट्रॉनिक सामान: इस दिन नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदना शुभ होता है, जिससे तकनीकी प्रगति और उन्नति के अवसर बढ़ते हैं।
- गाड़ी: धनतेरस पर वाहन खरीदना शुभ माना जाता है, जिससे यात्रा में सुख-सुविधा और जीवन में प्रगति होती है।
Conclusion:-Dhanteras 2025
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FAQ’s:-Dhanteras 2025
Q. धनतेरस कब मनाया जाता है?
Ans. धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जो दीपावली से दो दिन पहले आता है।
Q. धनतेरस का धार्मिक महत्व क्या है?
Ans. धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाती है, जिससे धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
Q. धनतेरस पर खरीदारी क्यों की जाती है?
Ans. मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं शुभ फल देती हैं और घर में बरकत एवं सुख-समृद्धि लाती हैं।
Q. धनतेरस की रात दीप जलाने का क्या महत्व है?
Ans. इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीप जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
Q. धनतेरस पर किस देवता का जन्म हुआ था?
Ans. समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे।
Q. धनतेरस पर कौन-कौन सी चीजें खरीदना शुभ माना जाता है?
Ans. इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, धनिया के बीज, नमक, इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहन खरीदना शुभ होता है।