
गुरु पूर्णिमा 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास Guru Purnima 2025: (Shubh Muhurat, Mahatva Aur itihas): गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में एक अत्यंत पवित्र पर्व है, जिसे गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। यह तिथि केवल शिष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है। क्या आप जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है?
यह पर्व क्यों मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक प्रभाव क्या है? यदि आप गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि हिंदू पंचांग के अनुसार इसका निर्धारण कैसे किया जाता है। इस दिन गुरु पूजा, विशेष अनुष्ठान और ज्ञान साधना का क्या महत्व है? क्या इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सफलता, आध्यात्मिक उत्थान और आत्मिक शांति मिलती है? इस लेख में हम आपको गुरु पूर्णिमा 2025 की सम्पूर्ण जानकारी देंगे—इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक इतिहास और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
यदि आप भी इस पावन अवसर पर अपने गुरु के प्रति आस्था प्रकट करना चाहते हैं और ज्ञान एवं भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें…..
गुरु पूर्णिमा क्या है? | Guru Purnima Kya Hai?
गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) एक पवित्र हिंदू त्योहार है, जो गुरु (शिक्षक) के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार आषाढ़ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। गुरु को ज्ञान और मोक्ष का मार्गदर्शक माना जाता है, और इस दिन शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं। यह दिन महर्षि वेद व्यास के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्हें हिंदू धर्म के महान गुरु और वेदों के संकलनकर्ता के रूप में जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करना और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए प्रेरित करना है।
गुरु पूर्णिमा 2025 कब है? | Guru Purnima 2025 Kab Hai?
गुरु पूर्णिमा 2025 (Guru Purnima 2025) में 10 जुलाई, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह त्योहार आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण रूप से प्रकाशित होता है, जो गुरु के प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। गुरु पूर्णिमा का यह शुभ दिन पूरे भारत और नेपाल में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने गुरु का आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
गुरु पूर्णिमा 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है? | Guru Purnima 2025 Ka Shubh Muhurat Kya Hai?
विवरण | तिथि | समय |
गुरु पूर्णिमा | 10 जुलाई 2025 | गुरुवार |
गुरु पूर्णिमा आरंभ | 10 जुलाई | रात्रि 01:36 बजे |
गुरु पूर्णिमा समाप्ति | 11 जुलाई | रात्रि 02:06 बजे |
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि क्या है? | Guru Purnima Ki Pooja Vidhi Kya Hai?
- गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद, अपने पूजा स्थल को साफ करें और वहां एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाएं। यह पूजा का आरंभिक चरण है।
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे फूल, धूप, दीपक, और नैवेद्य इकट्ठा करें। इन सामग्रियों का उपयोग गुरु की आराधना में किया जाएगा। यह सामग्री गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान को दर्शाती है।
- अगर इस भौतिक संसार में आपका कोई गुरु है तो आप उस गुरु की तस्वीर या मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें और अगर नहीं, तो आप भगवान शिव की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद, उनके सामने रंगोली या स्वस्तिक बनाएं। यह स्थान को पवित्र बनाने का कार्य है और पूजा की गंभीरता को बढ़ाता है।
- गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए उन्हें फूल, फल, और मिठाई अर्पित करें। इसके साथ ही, गुरु मंत्र का जाप करें। यह क्रिया गुरु के प्रति आपकी भक्ति और समर्पण को दर्शाती है।
- अंत में, गुरु की आरती करें और उनके चरणों में प्रणाम करें। इस समय, अपने मन में गुरु के प्रति आभार व्यक्त करें। यह पूजा का समापन है और आपके जीवन में गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर है।
गुरु पूर्णिमा का इतिहास क्या है? | Guru Purnima ka itihas kya Hai?
गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पावन दिन भारतीय संस्कृति में ज्ञान, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर भगवान वेद व्यास का जन्म हुआ था, जिन्हें हिंदू धर्म का आदि गुरु माना जाता है। वेद व्यास ने महाभारत की रचना की और वेदों तथा पुराणों का संकलन कर ज्ञान का अमूल्य भंडार मानव जाति को प्रदान किया। यही कारण है कि इस दिन को ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।
इसके अतिरिक्त, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण (Bhagwan Krishna) ने भी इसी दिन अपने गुरु ऋषि शांडिल्य से शिक्षा ग्रहण की और ज्ञान प्राप्त करने की परंपरा को और अधिक महत्व दिया। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह दिन विशेष है, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। इस प्रकार, गुरु पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सद्गुरु के प्रति समर्पण, आस्था और शिक्षा के प्रति सम्मान की भावना को जागृत करने वाला एक दिव्य अवसर है, जो हर युग में ज्ञान की ज्योति जलाए रखता है।
गुरु पूर्णिमा का महत्व क्या है? | Guru Purnima Ka Mahatva Kya Hai?
- गुरु की महिमा और आदर का प्रतीक: गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण प्रकट करने का विशेष अवसर है। यह दिन हमें सिखाता है कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति अधूरी है। गुरु अपने शिष्यों को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, धर्म और ज्ञान की रोशनी तक पहुंचाते हैं।
- आध्यात्मिक और वैदिक परंपरा से जुड़ा पर्व: गुरु पूर्णिमा का महत्व वेदों और पुराणों में भी वर्णित है। इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने महाभारत, वेदों और पुराणों की रचना कर ज्ञान का अमूल्य भंडार संकलित किया, जिससे यह दिन और भी विशेष बन गया।
- स्वयं के आत्म-विकास और ज्ञान साधना का अवसर: गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन ही नहीं, बल्कि आत्म-विश्लेषण और आत्म-विकास का भी अवसर है। यह दिन हमें जीवन में ज्ञान, अनुशासन और सच्चे मार्गदर्शन का महत्व समझाता है, जिससे हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकें।
Conclusion
हम आशा करते है कि हमारे द्वारा लिखा गया (गुरु पूर्णिमा 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास) यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आपके पास किसी भी तरह का सवाल या सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में जरुर दर्ज करें, हम जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे। बाकि ऐसे ही रोमांचक लेख के लिए हमारी वेबसाइट जन भक्ति पर दोबारा विज़िट करें, धन्यवाद
FAQ’s
Q. गुरु पूर्णिमा कब मनाई जाती है?
Ans. गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह 10 जुलाई, गुरुवार को मनाई जाएगी।
Q. गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है?
Ans. गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है और इसे महर्षि वेद व्यास के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों और महाभारत की रचना की थी।
Q. गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ क्यों कहा जाता है?
Ans. इस दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों, महाभारत और पुराणों का संकलन किया था, इसलिए इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।
Q. गुरु पूर्णिमा के दिन कौन-से प्रमुख आध्यात्मिक घटनाक्रम जुड़े हैं?
Ans. इस दिन भगवान बुद्ध ने अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश दिया था, और भगवान कृष्ण ने ऋषि शांडिल्य से शिक्षा ग्रहण की थी।
Q. गुरु पूर्णिमा 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है?
Ans. गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई 2025 को रात 01:36 बजे शुरू होगी और 11 जुलाई को रात 02:06 बजे समाप्त होगी।
Q. गुरु पूर्णिमा के दिन कौन-कौन से धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं?
Ans. इस दिन गुरु की पूजा, गुरु मंत्र का जाप, आरती, और प्रसाद अर्पण कर गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।