
हनुमान जयंती 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास Hanuman Jayanti 2025: (Shubh Muhurat, Mahatva Aur Itihas): हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और श्रद्धेय पर्व है, जिसे भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि केवल भक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए शक्ति, भक्ति और अटूट विश्वास का प्रतीक है। क्या आप जानते हैं कि हनुमान जयंती का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है? यह पर्व क्यों मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक प्रभाव क्या है? यदि आप हनुमान जयंती 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि हिंदू पंचांग के अनुसार इसका निर्धारण कैसे किया जाता है।
इस दिन हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना, सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ और दान-पुण्य का क्या महत्व है? क्या इस दिन विशेष अनुष्ठान करने से जीवन में सुख-समृद्धि, आत्मबल और संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है? इस लेख में हम आपको हनुमान जयंती 2025 की सम्पूर्ण जानकारी देंगे—इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक इतिहास और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
यदि आप भी इस पावन पर्व पर भगवान हनुमान (Bhagwan Hanuman) की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और भक्ति मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें…..
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हनुमान जयंती क्या है? | Hanuman Jayanti Kya Hai?

हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) हिंदू धर्म में भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन हनुमान जी की भक्ति और उनके बल, बुद्धि, और निष्ठा को समर्पित है। हनुमान जी को रामायण में भगवान राम के परम भक्त और सेवक के रूप में जाना जाता है। यह त्योहार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं, और हनुमान जी की आराधना करते हैं। यह त्योहार शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
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हनुमान जयंती 2025 कब है? | Hanuman Jayanti 2025 Kab Hai?
हनुमान जयंती 2025 (Hanuman Jayanti 2025) में 12 अप्रैल, शनिवार को मनाई जाएगी। यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त हनुमान जी की पूजा-अर्चना करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। हनुमान जयंती का यह शुभ दिन पूरे भारत में बड़े ही उत्साह और धार्मिक भावना के साथ मनाया जाता है।
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हनुमान जयंती 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है? | Hanuman Jayanti 2025 Ka Shubh Muhurat Kya Hai?
तिथि | शुभारंभ समय | समाप्ति समय |
चैत्र पूर्णिमा तिथि | 12 अप्रैल 2025, सुबह 03:20 बजे | 13 अप्रैल 2025, सुबह 05:52 बजे |
हनुमान जयंती तिथि | 12 अप्रैल 2025, शनिवार | (उदयातिथि के अनुसार) |
पूजा का शुभ समय | सुबह से शाम तक | विशेष रूप से प्रातः काल |
हनुमान जयंती का इतिहास क्या है? | Hanuman Jayanti Ka Itihas Kya Hai?
हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) का इतिहास हिंदू पौराणिक कथाओं और रामायण से जुड़ा हुआ है। यह पर्व भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन हुआ था। उनके पिता केसरी एक पराक्रमी वानर राजा थे, और माता अंजना, एक अप्सरा थीं, जिन्होंने शिव भक्ति के कारण वानरी रूप में जन्म लिया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने उन्हें हनुमान जी के रूप में वरदान दिया। इसी कारण हनुमान जी को शिव का अवतार भी माना जाता है।
हनुमान जी का जन्म भगवान राम (Bhagwan Ram) की सेवा और धर्म की रक्षा के लिए हुआ था। बचपन से ही वे अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चमत्कारी शक्तियों से संपन्न थे। एक कथा के अनुसार, बाल्यावस्था में हनुमान जी ने सूर्य को एक लाल फल समझकर निगलने का प्रयास किया, जिससे पूरा ब्रह्मांड अंधकारमय हो गया। इस पर देवराज इंद्र ने उन पर वज्र प्रहार किया, जिससे वे मूर्छित हो गए। इसके बाद पवन देव ने क्रोधित होकर संपूर्ण सृष्टि में वायु प्रवाह रोक दिया, जिससे त्रिलोक में हाहाकार मच गया। तब देवताओं ने हनुमान जी को असीम शक्तियों से संपन्न होने का वरदान दिया।
रामायण (Ramayan) में हनुमान जी ने भगवान राम और माता सीता की सेवा में अद्वितीय भूमिका निभाई। उन्होंने श्रीराम की सहायता के लिए समुद्र लांघकर लंका पहुंचकर सीता माता का पता लगाया और उन्हें श्रीराम का संदेश दिया। लंका दहन कर उन्होंने रावण को चेतावनी दी कि उसका अंत निश्चित है। इसके अलावा, युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए पूरा पर्वत उठा लाए और लक्ष्मण जी को पुनर्जीवित किया। उनकी भक्ति, बल, और बुद्धिमत्ता ने उन्हें एक महान देवता के रूप में प्रतिष्ठित किया।
हनुमान जयंती का उत्सव सदियों से मनाया जाता रहा है। इस दिन भक्त विशेष रूप से उपवास रखते हैं, मंदिरों में जाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं, और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। यह त्योहार केवल हनुमान जी के जन्म को याद करने के लिए नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, गुणों और सिद्धांतों को आत्मसात करने के लिए भी मनाया जाता है।
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हनुमान जयंती का महत्व क्या है? | Hanuman Jayanti Ka Mahatva Kya Hai?
- भक्ति और निष्ठा का प्रतीक: हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) भक्ति और निष्ठा के महत्व को दर्शाती है। हनुमान जी ने भगवान राम के प्रति अपनी अटूट भक्ति दिखाई, जो हमें अपने लक्ष्य और कर्तव्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।
- शक्ति और साहस का संदेश: हनुमान जी असीम बल और साहस के प्रतीक हैं। यह त्योहार हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और निडर रहने की प्रेरणा देता है।
- धर्म और कर्तव्य की रक्षा: हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) धर्म की रक्षा और कर्तव्यपरायणता का संदेश देती है। हनुमान जी ने अपने कर्तव्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जो हमें अपने जीवन में धर्म और नैतिकता का पालन करने की सीख देता है।
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हनुमान जयंती की पूजा विधि क्या है? | Hanuman Jayanti ki Puja Vidhi kya Hai?
- प्रातः स्नान और संकल्प: हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान हनुमान की पूजा का संकल्प लें और श्रद्धापूर्वक व्रत का पालन करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर, हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- हनुमान जी का अभिषेक: हनुमान जी की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें चंदन, सिंदूर, चमेली का तेल और फूल अर्पित करें। मान्यता है कि सिंदूर और चमेली के तेल का लेप हनुमान जी को विशेष प्रिय है।
- हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ: हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भक्तों को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
- विशेष भोग अर्पण: हनुमान जी को गुड़-चने, बेसन के लड्डू, केले और तुलसी पत्र का भोग अर्पित करें। उन्हें विशेष रूप से पान, गुलाब, और इमरती का भोग भी चढ़ाया जाता है। भोग अर्पण के बाद भक्तों में प्रसाद का वितरण करें।
- आरती और मंत्र जाप: पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें और “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें। दीपक और कपूर जलाकर भगवान को समर्पित करें। आरती के समय घर के सभी सदस्य एक साथ भगवान की स्तुति करें।
- दान-पुण्य और सेवा कार्य: इस दिन गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें। मंदिरों में भंडारे का आयोजन कर हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें। इस दिन बंदरों को गुड़ और चने खिलाना भी शुभ माना जाता है, जिससे हनुमान जी का विशेष आशीर्वाद मिलता है।
Conclusion
हम आशा करते है कि हमारे द्वारा लिखा गया (हनुमान जयंती 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास) यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आपके पास किसी भी तरह का सवाल या सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में जरुर दर्ज करें, हम जल्द से जल्द जवाब देने का प्रयास करेंगे। बाकि ऐसे ही रोमांचक लेख के लिए हमारी वेबसाइट जन भक्ति पर दोबारा विज़िट करें, धन्यवाद
FAQ’s
Q. हनुमान जयंती क्यों मनाई जाती है?
Ans. हनुमान जयंती (Hanuman Jayanti) भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह दिन उनकी भक्ति, शक्ति और निष्ठा को समर्पित होता है।
Q. हनुमान जयंती 2025 में कब मनाई जाएगी?
Ans. हनुमान जयंती 2025 (Hanuman Jayanti) में 12 अप्रैल, शनिवार को मनाई जाएगी। यह चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को पड़ती है।
Q. हनुमान जी के माता-पिता कौन थे?
Ans. हनुमान जी के पिता केसरी वानर राजा थे, और माता अंजना, एक अप्सरा थीं, जिन्होंने शिव भक्ति के कारण वानरी रूप में जन्म लिया था।
Q. हनुमान जी को शिव का अवतार क्यों माना जाता है?
Ans. हनुमान जी को शिव का अवतार माना जाता है क्योंकि माता अंजना की तपस्या के फलस्वरूप भगवान शिव ने उन्हें हनुमान जी के रूप में वरदान दिया था।
Q. रामायण में हनुमान जी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका क्या थी?
Ans. हनुमान जी ने सीता माता को लंका में खोजा, रावण के विरुद्ध युद्ध में मदद की, और संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी की जान बचाई।
Q. हनुमान जयंती पर भक्त कौन-कौन से धार्मिक अनुष्ठान करते हैं?
Ans. इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में जाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं, और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।