
करवा चौथ 2025: व्रत तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व Karwa Chauth 2025: (Vrat Tithi, Shubh Muhurat Aur Mahatva): करवा चौथ (Karva Chauth) भारतीय संस्कृति में प्रेम, समर्पण और आस्था का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष सुहागिन महिलाएं इस पावन व्रत को बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं। लेकिन करवा चौथ क्या है? इस व्रत का महत्व क्यों है? करवा चौथ 2025 में कब है? और इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा? ये ऐसे प्रश्न हैं, जो हर व्रती महिला और इस पर्व से जुड़े लोगों के मन में उठते हैं। इस खास दिन पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखमय दांपत्य जीवन की कामना करती हैं। इस पर्व की खासियत और इसकी पूजा विधि को समझना हर किसी के लिए जरूरी है, ताकि यह व्रत सही विधि-विधान से संपन्न हो सके। अगर आप भी करवा चौथ 2025 की तिथि, पूजन समय और इस पर्व के पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
आइए, करवा चौथ 2025 (Karva Chauth 2025) व्रत से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं और इसके महत्व को समझते हैं…
करवा चौथ क्या है? | Karva Chauth kya Hai?
करवा चौथ (Karva Chauth) उत्तर भारत, विशेषकर हिंदू समुदाय में मनाया जाने वाला एक प्रमुख व्रत त्योहार है, जो विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (चौथ) को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ती हैं। पूजा के दौरान करवा (मिट्टी का बर्तन) और स्थापित कथा का विशेष महत्व होता है। सुहागन महिलाएं सजधज कर पूजा करती हैं, सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी लगाती हैं, और सामूहिक रूप से कथा सुनती हैं। यह त्योहार प्रेम, समर्पण और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है।
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करवा चौथ 2025 में कब है? | Karva Chauth 2025 Mein kab Hai?
करवा चौथ 2025 (Karva Chauth) में 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती हैं। पूजा का मुहूर्त शाम 6:06 बजे से 7:19 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर महिलाएं चाँद को देखकर व्रत का पारण करती हैं। यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है।
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करवा चौथ 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है? | Karva Chauth 2025 ka Shubh Muhurat kya Hai?
विषय | विवरण |
व्रत तिथि | 24 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) |
पूजा का शुभ मुहूर्त | शाम 5:46 बजे से 7:02 बजे तक |
चंद्रमा उदय का समय | रात 8:12 बजे |
विशेष योग | कृत्तिका नक्षत्र, व्यतीपात योग |
करवा चौथ की पूजा विधि क्या है? | Karva Chauth ki Puja Vidhi kya Hai?
- स्नान एवं संकल्प: करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करें और निर्जला व्रत रखने का संकल्प लें। इस दौरान माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखने की प्रार्थना करें।
- सरगी ग्रहण करना: विवाहित महिलाओं को अपनी सास द्वारा दी गई ‘सरगी’ ग्रहण करनी चाहिए, जिसमें फल, मिठाइयाँ, और सूखे मेवे होते हैं। सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है, जिससे दिनभर उपवास रखने की ऊर्जा मिलती है।
- पूजन सामग्री एकत्रित करना: शाम को पूजा के लिए करवा, दीपक, हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल, मिठाई, गंगाजल और भगवान गणेश एवं माता पार्वती की मूर्ति की व्यवस्था करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर पूजा स्थल को सुसज्जित करें।
- शृंगार एवं करवा चौथ कथा: महिलाएँ पूरे शृंगार में सजकर करवा चौथ की कथा का श्रवण करती हैं। कथा के दौरान करवा (मिट्टी या पीतल का कलश) में जल भरकर उसे भगवान को समर्पित किया जाता है और कथा पूरी होने पर वरुण देव को अर्पित किया जाता है।
- चंद्रमा को अर्घ्य अर्पण: चंद्रमा के उदय होने पर महिलाएँ चलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बाद करवा में जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथ से पहला ग्रास ग्रहण कर उपवास तोड़ा जाता है।
- पति के हाथ से भोजन ग्रहण करना: व्रत खोलने के बाद महिलाएँ अपने पति के हाथ से पानी और मिठाई ग्रहण करके उपवास समाप्त करती हैं। इसके बाद परिवार के साथ भोजन कर व्रत संपन्न किया जाता है, जिससे दांपत्य जीवन में प्रेम और सौभाग्य बना रहता है।
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करवा चौथ का महत्व क्या है? | Karva Chauth ka Mahatva kya Hai?
- सांस्कृतिक और वैवाहिक बंधन: यह व्रत पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। मान्यता है कि यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुखद जीवन देता है। महिलाएं इस दिन सुहाग की परंपरागत वस्तुओं (जैसे करवा, सिंदूर) का उपयोग करती हैं, जो सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
- सामुदायिक एकता और कथा का प्रभाव: महिलाएं समूह में पूजा करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं, जो स्त्री सशक्तिकरण और सामुदायिक भाईचारे को बढ़ावा देती है। कथा में माता पार्वती और भगवान शिव के प्रेम की कहानी बताई जाती है, जो आस्था को गहरा करती है।
- आध्यात्मिक और शारीरिक अनुशासन: निर्जला व्रत शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक संकल्प को परखता है। मान्यता है कि यह व्रत मनोकामनाएं पूरी करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने का विज्ञान प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है।
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Conclusion
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FAQ’s
Q. करवा चौथ क्या है?
Ans. करवा चौथ उत्तर भारत में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत त्योहार है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं।
Q. करवा चौथ 2025 में कब मनाया जाएगा?
Ans. करवा चौथ 2025 में 24 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जब विवाहित महिलाएं पूरे दिन उपवास रखेंगी और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ेंगी।
Q. करवा चौथ 2025 का पूजा मुहूर्त क्या है?
Ans. करवा चौथ 2025 का पूजा मुहूर्त शाम 5:46 बजे से 7:02 बजे तक रहेगा, जबकि चंद्रमा का उदय रात 8:12 बजे होगा।
Q. करवा चौथ व्रत का धार्मिक महत्व क्या है?
Ans. करवा चौथ व्रत पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जिससे पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
Q. करवा चौथ की पूजा में करवा का क्या महत्व है?
Ans. करवा (मिट्टी का बर्तन) करवा चौथ पूजा में विशेष भूमिका निभाता है, जिसे देवी पार्वती और चंद्रमा को अर्पित किया जाता है।
Q. करवा चौथ पर कथा सुनने का क्या महत्व है?
Ans. करवा चौथ की कथा सुनना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह माता पार्वती और भगवान शिव के प्रेम और आशीर्वाद की कहानी को दर्शाती है।