
बगलामुखी जयंती 2025: शुभ मुहूर्त, महत्व व इतिहास Bagalamukhi Jayanti 2025: (Shubh Muhurat, Mahatva Aur Itihas): हिंदू धर्म में बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) एक अत्यंत शुभ और पावन पर्व माना जाता है। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे शक्ति उपासना और सिद्धि प्राप्ति का विशेष दिन भी माना जाता है। क्या आप जानते हैं कि देवी बगलामुखी का पौराणिक महत्व क्या है? इस दिन उनकी पूजा करने से शत्रु बाधा, नकारात्मक शक्तियों और कानूनी समस्याओं से मुक्ति क्यों मिलती है? यदि आप बगलामुखी जयंती 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह समझना आवश्यक है कि हिंदू पंचांग के अनुसार इसका निर्धारण कैसे किया जाता है।
इस दिन विशेष मंत्रों का जाप, हवन, और साधना करने से साधकों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं? क्या सही विधि से इस पर्व को मनाने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में विजय, समृद्धि एवं आत्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है? यदि आप भी इस पावन अवसर पर देवी बगलामुखी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और अपने जीवन से समस्त विघ्नों को दूर करना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।
इस लेख में हम आपको बगलामुखी जयंती 2025 (Baglamukhi Jayanti 2025) की सम्पूर्ण जानकारी देंगे—इसकी तिथि, शुभ मुहूर्त, पौराणिक महत्व और इस दिन किए जाने वाले धार्मिक कार्यों के बारे में विस्तार से बताएंगे……
बगलामुखी जयंती क्या है? | Baglamukhi Jayanti Kya Hai?

बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) हिन्दू धर्म में माँ बगलामुखी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं, जो शत्रुओं पर विजय, न्यायालयिक मामलों में सफलता और नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए प्रसिद्ध हैं। यह त्योहार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माँ बगलामुखी ने अस्त्र-शस्त्रों की शक्ति को नियंत्रित करके ब्रह्मांड की रक्षा की थी। इस दिन भक्त पीले वस्त्र धारण करके पीले फूल, हल्दी और मिष्ठान से पूजा करते हैं। तांत्रिक साधक इस दिन विशेष मंत्रों का जाप करते हैं।
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बगलामुखी जयंती 2025 कब है? | Baglamukhi Jayanti 2025 Kab Hai?
बगलामुखी जयंती (Baglamukhi Jayanti) हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। साल 2025 में बगलामुखी जयंती 5 मई को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इसी दिन देवी बगलामुखी का अवतरण हुआ था। इस दिन भक्त विशेष पूजा, हवन और मंत्र जाप करके देवी की कृपा प्राप्त करते हैं।
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बगलामुखी जयंती 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है? | Baglamukhi Jayanti 2025 Ka Shubh Muhurat Kya Hai?
S.NO | विवरण | शुभ समय |
1 | बगलामुखी जयंती | सोमवार, 5 मई 2025 |
2 | अष्टमी तिथि प्रारंभ | 4 मई 2025 सुबह 07:18 बजे |
3 | अष्टमी तिथि समाप्त | 5 मई 2025 सुबह 07:35 बजे |
बगलामुखी जयंती की पूजा विधि क्या है? | Baglamukhi Jayanti Ki Puja Vidhi Kya Hai?
- शुद्धिकरण और संकल्प: पूजा शुरू करने से पहले स्नान कर स्वयं को शुद्ध करें। पीले वस्त्र धारण करें और पीले आसन पर बैठें। फिर देवी बगलामुखी का ध्यान करते हुए संकल्प लें, जिसमें पूजा का उद्देश्य स्पष्ट करें, जैसे शत्रु बाधा निवारण या वाणी सिद्धि।
- मंत्र जाप और ध्यान: देवी बगलामुखी (Devi Baglamukhi) का ध्यान करते हुए “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का 108 या 1008 बार जाप करें। साधना के दौरान मानसिक एकाग्रता बनाए रखें और माँ से आशीर्वाद की प्रार्थना करें।
- पीले फूल और सामग्री अर्पण: देवी को पीले रंग से अत्यधिक प्रेम है, इसलिए उन्हें हल्दी, चने की दाल, पीले फूल (गेंदे या कनेर), हलवा और बेसन के लड्डू अर्पित करें। विशेष रूप से पीला वस्त्र और चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- हवन और आहुति: बगलामुखी यंत्र के सामने हवन करें। हवन में हल्दी मिश्रित घी और काली उड़द की आहुति दी जाती है। “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै स्वाहा” मंत्र का 108 बार उच्चारण करते हुए आहुति दें, जिससे सिद्धि और सुरक्षा प्राप्त होती है।
- कवच पाठ और स्तुति: देवी बगलामुखी का कवच, स्तोत्र और अष्टोत्तर शतनामavali का पाठ करें। यह साधक को शत्रुओं से रक्षा प्रदान करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। नियमित रूप से पाठ करने से मानसिक शक्ति और वाणी में प्रभाव बढ़ता है।
- आरती और क्षमा प्रार्थना: पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर देवी की आरती करें। “जय बगलामुखी माता” की गूंज के साथ पूजा संपन्न करें। अंत में किसी भी भूल-चूक के लिए देवी से क्षमा याचना करें और प्रसाद वितरण करें।
बगलामुखी जयंती की कथा क्या है? | Baglamukhi Jayanti Ki Katha Kya Hai?
हिंदू धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग के दौरान जब पृथ्वी पर भयंकर बाढ़ और तूफानों का तांडव मचा हुआ था, तब सम्पूर्ण सृष्टि विनाश के कगार पर थी। चारों ओर हाहाकार मचा था, जीव-जंतु संकट में थे, और मानव जाति पर अस्तित्व का खतरा मंडरा रहा था। यह भयंकर दृश्य देख भगवान विष्णु अत्यंत चिंतित हो उठे और समाधान की खोज में भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के समक्ष उपस्थित हुए। तब महादेव ने कहा, “इस महासंकट का निवारण केवल आदिशक्ति ही कर सकती हैं।”
भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) ने देवी जगदंबा की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर मां ने सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्वा झौल में बगलामुखी देवी के रूप में प्रकट होकर समस्त प्राणियों की रक्षा की और धरती को विनाश से बचाया। तभी से देवी बगलामुखी (Devi Baglamukhi) की पूजा अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाती है, क्योंकि वे बाधाओं को नष्ट करने वाली, शत्रुनाशिनी और विजय प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं।
बगलामुखी जयंती का महत्व क्या है? | Baglamukhi Jayanti Ka Mahatva Kya Hai?
- शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: बगलामुखी जयंती पर माँ बगलामुखी की साधना विशेष फलदायी होती है। इस दिन किए गए अनुष्ठान, मंत्र जाप और हवन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और साधक को अद्भुत मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
- वाणी, तर्क और न्याय में विजय प्राप्ति: माँ बगलामुखी को वाणी और तर्क की देवी माना जाता है। जयंती के दिन उनकी पूजा करने से वाणी में प्रभाव बढ़ता है, मुकदमों में सफलता मिलती है और व्यक्ति न्यायिक मामलों में विजय प्राप्त करता है। यह दिन वकीलों, वक्ताओं और राजनेताओं के लिए विशेष लाभकारी होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति और सिद्धियों की प्राप्ति: इस दिन साधक विशेष रूप से माँ बगलामुखी की साधना करके आत्मबल और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त कर सकते हैं। मंत्र सिद्धि, तांत्रिक अनुष्ठान और यंत्र साधना करने से सिद्धियों की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि आती है।
Conclusion
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FAQ’s:-Bagalamukhi Jayanti 2025
Q. बगलामुखी जयंती कब मनाई जाती है?
Ans. बगलामुखी जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह 5 मई को मनाई जाएगी।
Q. देवी बगलामुखी को किस शक्ति के रूप में पूजा जाता है?
Ans. देवी बगलामुखी को शत्रु नाश, वाणी सिद्धि और न्याय में विजय प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है।
Q. बगलामुखी जयंती पर कौन-से रंग का महत्व अधिक होता है?
Ans. इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। भक्त पीले वस्त्र पहनते हैं और देवी को पीले फूल, हल्दी व बेसन से बने प्रसाद अर्पित करते हैं।
Q. बगलामुखी जयंती पर कौन-सा मंत्र जाप किया जाता है?
Ans. इस दिन “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” मंत्र का 108 या 1008 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
Q. देवी बगलामुखी का अवतरण क्यों हुआ था?
Ans. देवी बगलामुखी का अवतरण सृष्टि को विनाशकारी तूफानों और नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए हुआ था।
Q. बगलामुखी जयंती पर कौन-से अनुष्ठान किए जाते हैं?
Ans. इस दिन देवी की पूजा, हवन, मंत्र जाप, यंत्र साधना और विशेष रूप से हवन में हल्दी मिश्रित घी की आहुति दी जाती है।